मुन्ने के आने कि खबर जब माँ ने पाई थी
तभी बिठा कर मुन्नी को इक बात माँ ने समझाई थी
दीदी बनने वाली हो, अब छोडो ये नादानी
मुन्ना करेगा शैतानी, तुम बनो अब ज़रा सयानी
माँ कि बात सुनी तो मुन्नी थोडा सा सकुंचाई थी
बड़े होने के एहसास से मुन्नी थोडा सा इतराई थी
पर माँ के कहने भर से ही मुन्नी कहाँ बड़ी हो पाई थी
तभी तो आँगन में खेलती मुन्नी ने दादी से झिड़की खाई थी
पर फिर भी मुन्ना के आने पर मुन्नी फूली नहीं समाई थी
और दीदी बनने पर मुन्नी थोडा थोडा इतराई थी
फिर देखते ही देखते मुन्नी सचमुच बड़ी हो आई थी
और तभी बुआ उसके लिए रिश्ता लेके आई थी
कहना चाहती थी वो कि अभी नहीं करनी है शादी
पर समझाने के नाम पर अम्मा ने उसकी आवाज़ दबा दी
बचपन से ही मुन्नी ये दादी से सुनती आई है
ये घर उसका नहीं है, वो इस घर के लिए परायी है
सोंचा मुन्नी ने शायद पिया के घर में मिले आजादी
पर तभी अम्मा ने मुन्नी को एक और बात बता दी
बाबुल के आँगन से पिया कि अटरिया, बेटियाँ डोली पर ही जाती हैं
पर आना हो वापस तो फिर अर्थी पर ही आती हैं
माँ कि ये बातें सुनकर मुन्नी बहुत बेचैन हो आई थी
आखिर लड़की पर क्यूँ ज़माने ने ये बंदिशें लगायी थी
कुछ सपने, कुछ आशाएं लिए मुन्नी अब पिया के घर में आई थी
पर वहाँ भी सासू माँ नें उसपर वही बंदिशें लगायी थीं
यहाँ तो उसे बंदिशों में ही रहना होगा
परिवार कि इज्ज़त पर सर्वस्व कुर्बान करना होगा
घर कि बहुएं तो परदे में ही अच्छी लगती हैं
बड़ी कि आज्ञा से ही देहरी के बहार पाव रखती हैं
सासू जी कि सीख से मुन्नी कि अखियाँ भर आई थी
पर अपनी गर्दन उसने फिर भी स्वीकृति में ही झुकाई ही
दीदी कभी बनी थी, अब तो बन गयी थी है वो दादी
पूरी ज़िन्दगी उसने घर कि चारदीवारी में ही बितादी
और दादी बनकर आज वो जब सोंच रही थी
बैठी हुई अतीत के पन्ने जब खोल रही थी
सोंचते हुए उसने केवल इतना ही पाया
कि भगवान ने क्यूँ उसको एक लड़की बनया
इससे तो अच्छा उसको चिडिया बनाया होता
ऐ काश! उसने अपनी मर्ज़ी से उड़ने का अधिकार तो पाया होता
heart rending!
By: Prateek Garg on November 30, 2007
at 5:08 PM
Awesome flow of thoughts !!! Its amazing…
By: :) on February 19, 2008
at 2:38 AM